किसानों के लिए मृत्युदंड जैसा है नया कृषि कानून, देश में मर चुका लोकतंत्र : राहुल

नई दिल्ली : कृषि विधेयकों को लेकर राहुल गांधी ने कहा है कि संसद से पारित किए गए कृषि विधेयक का कानून बनना हमारे किसानों के लिए मौत की सजा है.

राहुल ने एक खबर का जिक्र करते हुए ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि किसानों की आवाज को संसद और इसके बाहर भी कुचल दी जाती है. उन्होंने देश के लोकतंत्र पर तीखी टिप्पणी करते हुए अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर की शीर्षक के हवाले से लिखा, ‘यह इस बात का प्रमाण है कि भारत में लोकतंत्र मर चुका है.’ इससे पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इन कानूनों को किसानों के हितों के खिलाफ बताया था.

गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में बीते 20 सितंबर को राज्य सभा से कृषि विधेयक पारित किए गए थे. इन कानूनों को पारित कराने के दौरान सदन में भारी हंगामा भी हुआ था. बाद में सभापति वेंकैया नायडू ने सख्त कार्रवाई करते हुए आठ सांसदों को निलंबित कर दिया था. इससे पहले केंद्र सरकार में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी इन कानूनों के विरोध में पीएम मोदी के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था.

हालांकि, सरकार की ओर से इन कानूनों को किसानों के लिए वरदान बताया जा रहा है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि किसानों के हितों का संरक्षण करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. सरकार का कहना है कि देश में 86 प्रतिशत छोटे किसान हैं, जिन्हें अपनी कम मात्रा की उपज को बाजारों में ले जाने और उसका अच्छा मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई होती है. सरकार का कहना है कि प्रावधान में बदलाव के बाद किसानों को कई बंधनों से आजादी मिलेगी.

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