2000 करोड़ के घोटाले पर केजरीवाल का दो टूक जवाब- अगर घपला किया है तो करो गिरफ्तार

नई दिल्ली। स्कूलों के कमरे बनवाने में 2 हजार करोड़ के घपले के आरोपों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने कहा कि भाजपा के इशारे पर सीबीआइ ने हमारी सभी फाइलें जांच ली लेकिन कुछ नहीं मिला।

भाजपा की आलोचना करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अगर घपला हुआ है तो उन्हें तुरंत गिरफ़्तार क्यों नहीं कर लेते। सारी जांच एजेंसी केंद्र सरकार के पास है। उधर, मनोज तिवारी ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर फिर से पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि एजेंसियां अपना काम करेंगी। आप सरकार भाजपा के सवालों का जवाब दे।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि दिल्ली में गरीबों को मिल रही अच्छी शिक्षा भाजपा रोकना चाहती है। ट्विटर पर केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में पहली बार गरीब बच्चे इतने अच्छे स्कूलों में पढ़ने लगे। पहले केवल अमीर बच्चों को ऐसे स्कूल नसीब होते थे। अब ऑटो, आया, मज़दूरों के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और वक़ील बनने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसा नहीं चाहती। इसीलिए जान बूझकर भाजपा शासित राज्यों में स्कूलों को ख़राब रखा हुआ है।

मनीष सिसोदिया ने दी गिरफ्तारी की चुनौती
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी भाजपा और मनोज तिवारी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्होंने कोई घोटाला किया है तो क्यों नहीं कर गिरफ्तार कर लिया जाता। सिसोदिया ने कहा कि अगर उन्होंने घोटाला किया है तो गिरफ़्तार करें या फिर शाम तक दिल्ली के लोगों से भाजपा माफ़ी मांगे। दिल्ली के पेरेंट्स से, दिल्ली के बच्चों से माफ़ी मांगें जिनके लिए ये स्कूल बन रहे हैं।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में भाजपा को बर्दाश्त नहीं हो रहा कि एक ग़रीब आदमी का बच्चा, एक रिक्शावाले का, ऑटोवाले का बच्चा, एक आया का बच्चा इन शानदार सरकारी स्कूलों में पढ़कर बड़ा आदमी बन सके। मनोज तिवारी को चुनौती देते हुए सिसोदिया ने कहा कि वह किसी भी भाजपा शासित राज्य के दस सबसे अच्छे स्कूल चुन लें और दस अच्छे स्कूल मैं बताता हूं। तुलना कर लीजिए। दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।

भाजपा ने लगाया है 2000 करोड़ घपला का आरोप
सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में दो हजार करोड़ का घोटाला हुआ है। मनोज तिवारी ने कहा कि एक आरटीआई से पता चला है कि स्कूलों में कमरों के निर्माण के लिए अतिरिक्त 2000 करोड़ रुपये दिए गए थे जो केवल 892 करोड़ रुपये में बनाए जा सकते थे। टास्क दिए गए 34 ठेकेदारों में उनके भी रिश्तेदार शामिल हैं।

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