ढ़ाई महीने तक चला ड्रामा खत्म, सोनिया गांधी बनीं कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष

नई दिल्ली। कांग्रेस में राहुल गांधी की जगह सोनिया गांधी ही लेंगी। कार्यसमिति की शनिवार को बुलाई गई बैठक में देर रात सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष चुनने का फैसला किया गया। हालांकि राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देते हुए यह एलान किया था कि पार्टी का अगला अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर का होगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी नेताओं ने यही महसूस किया कि सबसे बेहतर विकल्प पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ही हैं।

कांग्रेस में पिछले लंबे समय से अंतरिम अध्यक्ष के रूप में मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नाम चल रहे थे, लेकिन कार्यसमिति की बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने महसूस किया कि सोनिया को ही फिलहाल बागडोर सौंपना तार्किक भी है और पार्टी को आगे ले जाने के लिए जरूरी भी।

सोनिया गांधी मार्च 1998 से दिसंबर 2017 तक करीब 20 साल पार्टी अध्यक्ष रहीं और इस दौरान पार्टी को फिर से स्थापित करने और मजबूत बनाने में उनके नेतृत्व की भी उल्लेखनीय भूमिका रही। शनिवार सुबह कार्यसमिति की बैठक शुरू होते ही सबसे पहले सभी ने एक सुर से राहुल गांधी से इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया।

पार्टी नेताओं का कहना था कि मौजूदा कठिन चुनौती के दौर में भाजपा से मुकाबले के लिए कांग्रेस के पास उनसे बेहतर कोई विकल्प नहीं है। मगर राहुल ने बिना देर किए इस्तीफा वापस लेने से इन्कार कर दिया। साथ ही पार्टी नेताओं को भरोसा दिया कि वह अध्यक्ष नहीं रहने के बावजूद पार्टी की राजनीतिक लड़ाई में नए नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के साथ दोगुनी ताकत से हर पल साथ रहेंगे।

राहुल के इस रुख के बाद नए अध्यक्ष के चयन के लिए व्यापक चर्चा की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पांच समूहों का गठन किया गया। इनमें दो अलग-अलग समूहों में राहुल गांधी और सोनिया गांधी का नाम भी शामिल था मगर दोनों ने रायशुमारी की प्रक्रिया से खुद को दूर रखा। चर्चा में शामिल न होकर राहुल के साथ बैठक से बाहर निकलने के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि रायशुमारी में उन दोनों का रहना उचित नहीं था।

पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा कि नए अध्यक्ष के चयन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उच्च मानदंडों के अनुरूप सोनिया और राहुल गांधी ने समूहों की बैठक में हिस्सा लेना मुनासिब नहीं समझा क्योंकि दोनों ही नहीं चाहते थे कि उनकी निजी राय किसी भी तरह चयन को प्रभावित करे।

इन समूहों के नेताओं से अध्यक्ष के लिए लोगों की पसंद जानने और सबकी राय बकायदा लिखित रूप में अपनी-अपनी रिपोर्ट में शनिवार रात आठ बजे तक कार्यसमिति को सौंपने को कहा गया था। मकसद यह था कि इन समूहों के नेताओं से हुई चर्चा के बाद जिस नाम पर सबसे ज्यादा सहमति होगी उसे ही पार्टी की बागडोर सौंप दी जाएगी।

हालांकि इन समूहों की रायशुमारी में भी अधिकांश पार्टी नेता राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए रखने की वकालत कर रहे थे। रात में जब कार्यसमिति की दूसरे दौर की बैठक हुई तो उसमें भी गांधी परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति के नाम पर सहमति नहीं बन सकी और सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया।

गांधी परिवार ने खुद को अलग किया 

चर्चा में शामिल न होकर राहुल के साथ बैठक से बाहर निकलने के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि रायशुमारी में हम दोनों का रहना उचित नहीं। रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा कि नये अध्यक्ष के चयन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उच्च मानदंड के अनुरूप सोनिया और राहुल गांधी ने समूहों की बैठक में हिस्सा लेना मुनासिब नहीं समझा क्योंकि दोनों नहीं चाहते थे कि उनकी निजी राय किसी तरह चयन को प्रभावित करे। राहुल के इस्तीफे के बाद असमंजस के दौर से पार्टी को निकालने के लिए शुरू हुई निर्णायक बैठक में कार्यसमिति ने सबसे पहले एक सुर से राहुल गांधी से इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया।

राहुल के इंकार के बाद नये अध्यक्ष के चयन के लिए व्यापक चर्चा करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पांच समूहों का गठन किया गया। इन समूहों को नेताओं से अध्यक्ष के लिए लोगों की पसंद जानने और सबकी राय बकायदा लिखित रुप के साथ अपनी-अपनी रिपोर्ट रात आठ बजे से पहले कार्यसमिति को सौंपने को कहा गया। इस समूह के नेताओं से हुई चर्चा के बाद जिस नाम पर सबसे ज्यादा सहमति होगी उसे ही पार्टी की बागडोर सौंपी जाएगी।

राहुल के दखल के बाद नये अध्यक्ष पर रायशुमारी के लिए बने पांच समूह
कांग्रेस के नये नेतृत्व की रेस में शामिल कुछ नेताओं के नाम पर सवाल उठाने के प्रदेश के नेताओं के रुख को देखते हुए कार्यसमिति ने नये अध्यक्ष के नाम पर सहमति के लिए चर्चा का दायरा बढ़ा दिया। राहुल गांधी के दखल के बाद नये अध्यक्ष पर सूबे के नेताओं से भी रायशुमारी कराने का फैसला करते हुए पांच अलग-अलग समूहों का गठन किया गया।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले शुक्रवार देर रात राहुल ने नये अध्यक्ष पर पार्टी के सभी प्रदेशों के अध्यक्षों, विधायक दल के नेताओं, सांसदों, अग्रिम संगठनों के प्रमुखों और एआइसीसी के सचिवों से मशविरा करने का रुख साफ कर दिया था। इसीलिए कार्यसमिति ने पांच समूहों का गठन किया।

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के नेताओं से चर्चा के लिए बने समूह में अंबिका सोनी, अहमद पटेल, ओमेन चांडी, हरीश रावत, दीपक बाबरिया, बालासाहब थोराट, एएन सिंह, मुनियप्पा, लुजिनो फेलेरियो, मीरा कुमार, सचिन राव और अरुण यादव को इसकी जिम्मेदारी दी गई।

पूर्वी भारत के नेताओं से मशविरे के लिए बने समूह में सोनिया गांधी, तरुण गोगोई, कुमारी शैलजा, गइखंगम, केसी वेणुगोपाल, आरपीएन सिंह, जितेंद्र सिंह, पीएल पुनिया, शक्ति सिंह गोहिल, दीपेंद्र हुड्डा और सुष्मिता देव को रखा गया। मगर सोनिया गांधी इसमें शामिल नहीं हुई।

उत्तर के राज्यों के नेताओं से चर्चा के लिए बने समूह में प्रियंका गांधी वाड्रा, अविनाश पांडेय, ताम्रध्वज साहू, रघुवीर मीणा, पी चिदंबरम, ज्योतिरादित्य सिंधिया, पीसी चाको, आशा कुमारी, जी संजीव रेड्डी और रजनी पाटिल को रखा गया।

पश्चिम के राज्यों के लिए बने समूह में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खडगे, गुलाम नबी आजाद, मोतीलाल वोरा, एके एंटनी, के सिद्धारमैया, ए चेल्लाकुमार, जितिन प्रसाद, कुलदीप विश्नोई, श्रीनिवास बीवी और गौरव गोगोई को रायशुमारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन राहुल ने भी राय जानने की इस कसरत में हिस्सा नहीं लिया।

दक्षिणी राज्यों के समूह की अगुआई पूर्व प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह ने की। इसमें आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक, अधीर रंजन चौधरी, रणदीप सुरजेवाला, आरसी खुंटिया, तारिक हामिद कारा, लालजी देसाई, नीरज कुंदन और राजीव सातव भी शामिल थे।

कई दलित समुदाय के नेता दौड़ में
सूत्रों का कहना है कि खड़गे समेत कई दलित समुदाय के नेता अध्‍यक्ष पद की दौड़ में शामिल थे। नए अध्यक्ष को लेकर मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खड़गे, अशोक गहलोत, सुशील कुमार शिंदे समेत कई वरिष्ठ नेताओं के नामों की चर्चा है।

प्रदेशों के नेताओं ने साफ किए इरादे 
बताया जाता है कि शुक्रवार को हुई कांग्रेस नेताओं की यह बैठक अनुच्छेद 370 के मसले पर आमराय बनाने के लिए बुलाई गई थी लेकिन इसमें नए अध्यक्ष को लेकर तमाम प्रदेशों के नेताओं ने अपने इरादे साफ कर दिए। इन नेताओं का कहना था कि पार्टी का एक वर्ग नए अध्यक्ष के लिए कुछ ऐसे नामों को आगे बढ़ा रहा है जो पार्टी का नेतृत्व करने में उतने सक्षम नहीं हैं। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने तो साफ कहा कि कुछ स्वार्थी लोग राहुल गांधी की कुर्बानी पर पानी फेरने की कोशिश में प्रायोजित नामों को उछाल रहे हैं।

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