स्कूल ट्रांसपोर्ट एकता यूनियन का मधुबन चौक पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन, नया मोटर अधिनियम वापस लेने की मांग

 नई दिल्ली (जनमत की पुकार)। सोमवार को स्कूल ट्रांसपोर्ट एकता यूनियन, दिल्ली के बैनर तले स्कूल कैब ट्रांसपोर्टर व ड्राइवरों ने नए मोटर वाहन अधिनियम का जोरदार विरोध किया। यूनियन के अध्यक्ष रामचंद्र और सचिव रवि अरोड़ा के नेतृत्व में स्कूल कैब ट्रांसपोर्टरों ने सरकार पर नए एक्ट के अंतर्गत भारी जुर्माने का प्रावधान कर रोजी-रोटी छिनने का आरोप लगाया। इस दौरान भारी संख्या में स्कूल कैब ट्रांसपोर्टर व ड्राइवरों ने मधुबन चौक पर इकट्ठा होकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने नए मोटर क़ानून को काला कानून बताया।
इस मौके पर प्रदर्शनकारियों के साथ मौजूद यूनियन के सचिव रवि अरोड़ा ने बताया कि जब तक दिल्ली की सड़कें विदेशों की तरह गाड़ियों के अनुकूल न हो जाए, तब तक बड़े जुर्माने का प्रावधान ना किया जाय। उन्होंने आरोप लगाया कि आज हालात ऐसे हैं कि कहीं रेड लाइट काम नहीं करती, तो कहीं रेड लाइट के सामने राजनीतिक पार्टी वालों के ही बोर्ड लगे हुए हैं। साइन बोर्डों के ऊपर भी किसी न किसी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा अपने बोर्ड चिपका दिए गए हैं। रेड लाइट के सामने पेड़ झुके हुए हैं। जिसके कारण रेड लाइट नहीं दिखाई देती। कहीं-कहीं तो हालत इतनी बुरी है कि रेड लाइट का ग्रीन हिस्सा काम करता है लेकिन रेड नहीं करता। जो दिखाई ना देने के कारण रेड लाइट क्रॉस हो जाती है। और ट्रैफिक पुलिस जो मौके की तलाश में खड़ी होती है और तुरंत गाड़ी को रोक के धारा 206 के तहत ड्राइवर का लाइसेंस तीन महीने के लिए सस्पेंड कर देती है। अब ऐसे हालात में बिना काम किए वह ड्राइवर अपना परिवार कैसे चलाएगा।

वहीँ यूनियन के अध्यक्ष रामचंद्र ने बताया कि जो ड्राइवर रोज 300 से 400 रुपए कमाता है, उसे अगर 2000 रुपए जुर्माना भरना पड़े, तो उसकी रोजी-रोटी का क्या होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अविलंब इस नए मोटर अधिनियम को वापस लेकर ट्रांसपोर्टरों को राहत देने की मांग की। उन्होंने आगे कहा कि नया मोटर क़ानून ट्रांसपोर्टरों व ड्राइवरों पर भारी पर रहा है।  बढे हुए भारी जुर्माने की राशि भरने में असमर्थ ट्रांसपोर्टर अपना व्यवसाय समेटने की सोच रहे हैं। स्कूल ट्रांसपोर्ट एकता यूनियन के अध्यक्ष रामचंद्र व सचिव रवि अरोड़ा ने दिल्ली के राज्यपाल से भी अखबार के माध्यम से गुहार लगाई कि ट्रांसपोर्टरों के हित में दिल्ली से नया मोटर वहां अधिनियम हटाया जाय।

स्कूल ट्रांसपोर्ट एकता यूनियन के सुझाव :
 अगर ड्राइवर ने प्रॉपर तरीके से सीट बेल्ट और ड्रैस पहन रखी हो, तो उसकी गाड़ी को पेपर चेक करने के नाम पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा ना रोका जाए। अगर बगैर सीट बेल्ट बगैर ड्रेस के कोई गाड़ी चलती नजर आती है, तो ट्रैफिक पुलिस उसे रोककर उसके कागज भी चेक करें। मात्र कागज चेक करने के नाम पर गाड़ी ना रोकी जाए। इससे भ्रष्टाचार में भारी गिरावट आएगी। ट्रैफिक पुलिस को एक निर्देश और जारी किया जाए कि स्कूल टाइमिंग के दौरान रेड लाइट के बीच खड़े होकर प्रॉपर तरीके से रेड लाइट को भी ट्रैफिक पुलिस द्वारा चलाया जाए। जिससे जाम ना लगे और बच्चे समय पर स्कूल पहुंच सकें। कई बार देखा जाता है रेड लाइट खराब होने की स्थिति में ट्रैफिक पुलिस के ना होने से स्कूल के बच्चे लेट हो जाते हैं। घर या स्कूल जाने में कई बार तो 100 नंबर पर या सर्कल में कॉल करके ट्रैफिक पुलिस को बुलाना पड़ता है। जबकि इनकी ड्यूटी रेड लाइट के बीच में होती है। ऐसा कम ही देखा गया कि स्कूल टाइम के दौरान ट्रैफिक पुलिस रेड लाइट के बीच में खड़ी हो।

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