दिल्ली में सस्ती होने वाली थी शराब, लेकिन कोरोना सेस हटाने का प्रस्ताव टला

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है, जिसके चलते लोगों से लेकर सरकार तक की आमदनी रुक गई है। ऐसे में लॉकडाउन के तीसरे चरण में शराब की दुकानें खोलने की इजाजत मिली, जिससे राज्य सरकारों की सबसे अधिक कमाई होती है। ऐसे में दिल्ली सरकार ने आमदनी बढ़ाने के लिए शराब पर 70 फीसदी कोरोना सेस लगाने का फैसला किया था। पहले तो दिल्ली सरकार के फैसले की आलोचना हुई, लेकिन धीरे-धीरे कई राज्यों ने थोड़ा बहुत सेस कोरोना के नाम परलगा दिया, ताकि उनकी आमदनी हो सके।
कोरोना सेस की वजह से दिल्ली सरकार की कमाई तो खूब हुई, लेकिन आज अचानक ये चर्चा शुरू हो गई कि इस सेस को हटाया जा रहा है। ट्विटर पर भी लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया, लेकिन सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई। अब खबर ये आ रही है कि दिल्ली सरकार ने उस सेस को खत्म करने का प्रस्ताव फिलहाल के लिए टाल दिया है।

10 दिन में 170 करोड़ रुपये की शराब बिकी
दिल्ली वासियों ने चार मई को शराबघर खुलने के बाद दस दिन के भीतर ही 170 करोड़ रुपये की दारू गटक ली थी। एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार को शराब की बिक्री पर विशेष कोरोना शुल्क लगाने से 70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई भी हुई।

रोज हो रहा 700 करोड़ रुपये का नुकसान
पहले लॉकडाउन और लॉकडाउन 2.0 के दौरान सब कुछ बंद रहा। इस दौरान शराब की बिक्री भी बंद थी, जिसकी वजह से पूरे देश में रोजाना 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लॉकडाउन 3.0 में शराब की दुकानें खुलीं तो सरकारी कमाई फिर से शुरू हो गई।

15-30 फीसदी आय शराब से
अधिकतर राज्यों की 15-30 फीसदी आय शराब से ही होती है। सिर्फ शराब से ही राज्यों को हर साल (2019 के अनुसार) करीब 2.48 लाख करोड़ रुपए की कमाई होती है। 2018 में भी 2.17 लाख करोड़ रुपए और 2017 में 1.99 लाख करोड़ रुपए की कमाई हुई थी।

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