जालोर जिले के पेयजल प्रबंधन में स्थानीय स्तर पर समन्वय से काम करने की जरूरत : मुक्तानंद अग्रवाल

जनमत की पुकार ब्यूरो
जालोर ( अशोक सुथार )। वरिष्ठ आई.ए.एस. जिला प्रभारी अधिकारी मुक्तानंद अग्रवाल ने जिले के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एंव नर्मदा प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे अपने क्षेत्र में पेयजल प्रबन्धन को सुचारू बनाये रखने के लिए स्थानीय स्तर पर समन्वय से काम करते हुए जिम्मेदारियों को अंजाम दें। गाईडलाईंस का पालन करें।
जिला अधिकारी शनिवार को कलेक्ट्रेट के सभा कक्ष में जिले के जलदाय प्रबंधन से जुड़े विभागाधिकारियों की बैठक ले रहे थे।
श्री अग्रवाल ने जलदाय विभाग के अधीक्षण एवं अधिशाषी अभियंताओं से कहा कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए उन्हें पेयजल वितरण को सुचारू रखने के लिए टैंकर्स से पेयजल परिवहन की आवश्यकताओं की पूर्ति कन्टीजेंन्सी प्लान के तहत करें।
उन्होंने कहा कि जिले के जिस गांव में पानी की कमी हो वहां टैंकर्स से जलापूर्ति कर गांववासियों को पेयजल उपलब्ध करायें। उन्होंने अधीक्षण अभियंता ताराचंद कुलदीप, के.एल.कांत (नर्मदा प्रोजेक्ट),  अधिशाषी अभियंता आशीष द्विवेदी, के.सी.सिंगारिया और महेन्द्र सिंह राठौड़ से जालोर, भीनमाल, सांचौर एवं चितलवाना से जिले में जिले में पेयजल वितरण प्रबंधन के बारे में विस्तार से चर्चा कर जीपीएस डिस्ट्रीब्युशन सिस्टम की निगरानी करने एवं सुचारू बनाये रखने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में ट्यूबवैल एवं हैंड पंप व्यवस्था को पुख्ता रखने की बात कही।
जिला कलक्टर हिमांशु गुप्ता ने विभाग के अधिकारियों से कहा कि उन्हें सीमित संसाधनों से पेयजल वितरण व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के कार्य को जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करें। उन्होंने अवैध कनेक्शन काटने, टैंकर ट्रांसपोरटेशन संधारण रजिस्टर को हमेशा अपडेट रखने को कहा।
उन्होंने  प्रभारी अधिकारी को बताया कि जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल प्रबंधन की दृष्टि से व्यवस्थाओं को पुख्ता किया गया है। चितलवाना क्षेत्र में पेयजल वितरण व्यवस्था के लिए तकनीकी अभियंता को पाबंद किया गया है। उन्होंने बताया कि चितलवाना क्षेत्र में पशु ज्यादा है और फ्लोराईडयुक्त पानी है। वहां टैंकर्स से पेयजल परिवहन आपूर्ति कर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कन्टीजेन्सी प्लान के अंतर्गत पम्प सैट एवं पाईपलाईन के 45.80 लाख रूपये की लागत के 3 कार्य प्रगति पर हैं।
अधीक्षण अभियंता ताराचंद कुलदीप ने बताया कि जालोर एवं सांचौर शहर में 48 घंटे के अन्तराल से एक सौ दस लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से, भीनमाल में 100 लीटर प्रति व्यक्ति के हिसाब से 96 घंटे के अंतराल से पानी वितरण किया जा रहा है।
जिले के 793 गांवों में से 509 में 24 घंटे के, 167 गांव में 48 घंटे, 52 गांव में 72 घंटे, 10 गांव में 96 घंटे के अंतराल से तथा 12 गांव में स्थानीय स्त्रोतों से तथा 43 गांवों में टैंकर से पेयजल पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गत माह कन्टीजेंसी प्लान के तहत भीनमाल शहरी क्षेत्र में 3 नये नलकूपों की स्वीकृति प्राप्त कर एक नलकूप को चालू कर दिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्र में 21 नलकूपों को चालू कर दिया गया है। शेष नलकूपों का कार्य प्रगति पर है। ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल से संभावित 130 गांव 231 ढाणियों को चिंहित किया गया है। चिंहित स्थानों पर जल परिवहन हेतु 121.26 लाख की स्वीकृति प्राप्त कर वर्तमान में 43 गांव, 20 ढाणियों में 38 टैंकर्स के माध्यम से 122 ट्रिप कर प्रतिदिन पानी पहुंचाया जा रहा है।
जिला प्रभारी अधिकारी ने जिले में डिफ्लोराईडेशन संयंत्रों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया गया कि जिले में 49 ऊर्जा आधारित डीफ्लोराईडेशन संयंत्र क्रियाशील हैं। 181 आर.ओ. संयंत्र क्रियाशील हैं।
अधिशाषी अभियंता जालोर आशीष द्विवेदी ने डी आर, ई आर और एफ आर प्रोजेक्ट के तहत पेयजल आपूर्ति प्रबंधन की जानकारी दी और बताया कि इससे जालोर, सांचौर, रानीवाड़ा, जसवंतपुरा क्षेत्र में पानी वितरित किया जा रहा है।
अधिशाषी अभियंता भीनमाल के.सी.सिंगारिया ने बताया कि भीनमाल क्षेत्र में 8 ट्यूबवैल एवं नर्मदा प्रोजेक्ट के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।
बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर सी.एल.गोयल, आई.ए.एस. प्रशिक्षु गिरधर, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश कविया, जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक भानुप्रताप सिंह सहित अन्य अधिकारी थे।
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