तेज बारिश व खराब मौसम के कारण बढ़ गया है वज्रपात का प्रकोप,आपदा प्रबंधन ने बचाव के लिए इन्द्रवज्र ऐप किया लांच

पूर्णिया (श्याम नन्दन)। जिले में मानसून प्रवेश कर चुका है. इस मौसम में किसी भी समय बारिश के होने के साथ ही वज्रपात की संभावना ज्यादा बढ़ गई है. हालांकि इसी समय में लोगों को अपने बचाव के लिए सजग रहना बहुत जरुरी है. बारिश के दौरान बिजली के कड़कने पर घर से बाहर लोग इसके चपेट में आ सकते हैं और इससे लोगों की जान तक जा सकती है. इसलिए ऐसे समय में जितना हो सके बारिश के दौरान बाहर निकलने से बिलकुल बचे.

आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा वज्रपात
की पूर्व चेतावनी देने के लिए एक मोबाइल ऐप्प “इन्द्रवज्र” का निर्माण किया गया है, जो लोगों को ठनका गिरने की जानकारी दे कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का निर्देश देता है. इस एप्प को गूगल प्ले स्टोर से आसानी से डाऊनलोड किया जा सकता है. इस मोबाइल एप्प को डाऊनलोड करने के बाद व्यक्ति को लगभग 20 कि.मी. की परिधि में वज्रपात की चेतावनी के संदेश 40 से 45 मिनट पूर्व ही अलार्म टोन के माध्यम से दे दी जाएगी. इससे लोग समय रहते ही सुरक्षित स्थान पर पहुंच कर खुद को वज्रपात के चपेट से बचा सकते हैं.

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सरकार के द्वारा वज्रपात की चपेट में आने से अगर कोई व्यक्ति घायल होता है या किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके लिए मुआवजे का प्रावधान किया गया है. वज्रपात से व्यक्ति की मृत्यु पर आश्रित को 4 लाख रुपये जबकि घायल हुए व्यक्ति को 4300 से 2 लाख रुपये तक का मुआवजा राशि सरकार द्वारा दिया जाता है. इसके अलावा वज्रपात के कारण अगर किसी का घर क्षतिग्रस्त होता है तो उन्हें भी सरकार द्वारा मुआवजा दी जाती है. प्रति झोपड़ी की क्षति पर 2100 रुपये जबकि कच्चा या पक्का मकान के पूर्ण क्षतिग्रस्त होने पर 95100 रुपये तक की राशि सरकार द्वारा दिया जाता है.

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दुधारू गाय, भैंस की मृत्यु पर 30000, बैल, भैंसा पर 25000 व भेड़, बकरी पर 3000 रुपये प्रति पशु मुआवजा राशि देने का प्रावधान है. मुआवजा मिल जाना एक बात है, लेकिन वही दूसरी ओर थोड़ी भी लापरवाही हुई तो लोग इसके चपेट में आ जाते है. लोग एतिहातन के तौर पर कुछ सावधानियां बरते वज्रपात से बच जायेगा. वही अब आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा “इन्द्रवज्र” ऐप का निर्माण किया गया है जो वज्रपात के लगभग आधे घंटे पहले ही जानकारी दे देगी.

आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा वज्रपात से बचाव के लिए कुछ आवश्यक गाईड लाइन भी जारी किए गए हैं.

  • पक्के मकान में शरण लें.
  • सफर के दौरान अपने वाहनों में ही बने रहें, बाहर निकलने का कतई प्रयास न करें.
  • समूह में न रहकर अलग-अलग रहें.
  • संचार साधनों से मौसम की जानकारी उक्त दौरान पल पल लेते रहें.
  • यदि आप खेत-खलिहान में काम कर रहे हैं तो जहां हैं वही रहें व पैरों के नीचे सुखी चीजें जैसे – लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखा पत्ता रखें.
  • दोनों पैरों को आपस में सटा लें, दोनों हाथों को घुटनों पर रखकर अपने सिर को जमीन के तरफ झुका लें.
  • सिर को जमीन में न सटने दें.
  • जमीन पर बिल्कुल भी न लेटें.
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