पढ़िए- लालकृष्ण आडवाणी वह ‘विवादित’ बयान, जिसने 2004 में मचा दी थी खलबली

फरीदाबाद। अपने ताजा ब्लॉग से चर्चा में आए भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने 15 साल पहले भी देश भर के क्षेत्रीय दलों का असहज कर दिया था। आडवाणी ने 3 मार्च 2004 को पलवल (फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र) में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था- ‘देशवासियों को देश हित में राष्ट्रीय दलों को ही वोट करना चाहिए। क्षेत्रीय दलों के मजबूत होने से केंद्र में मजबूत नहीं, बल्कि मजबूर सरकार बनती है।’

असल में तब आडवाणी पांच साल चली एनडीए सरकार के दौरान क्षेत्रीय दलों के रूठने-मनाने के कुचक्र से इतने दुखी थे कि उन्होंने अपना बयान देने से पहले यह भी नहीं सोचा कि जहां वे यह बात कह रहे हैं, वहां के प्रमुख क्षेत्रीय दल के साथ उन्होंने पांच साल तक केंद्र में सरकार चलाई है। दिल्ली से 60 किलोमीटर दूर पलवल में दिए इस बयान के बाद देश की राजनीति में तूफान आ गया था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कोर टीम के भाजपा नेताओं ने आडवाणी के इस बयान से किनारा भी किया था। इतना ही नहीं, 2004 के इंडिया शाइनिंग के नारे के बावजूद भाजपा की हार के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने आडवाणी के पलवल में दिए क्षेत्रीय दलों के बयान को भी हार का कारण माना था। पलवल की सभा में आडवाणी के साथ भाजपा के निवर्तमान सांसद रामचंद्र बैंदा, तत्कालीन केंद्रीय मंत्री साहिब सिंह वर्मा, सुषमा स्वराज भी थे।

आडवाणी के कथन पर बिफर गए थे ओपी चौटाला

पलवल में आडवाणी ने जब क्षेत्रीयों दलों से अलग रहने का बयान दिया तो हरियाणा में सत्तारूढ़ दल इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) सत्तारूढ़ था। इतना ही नहीं इनेलो केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का घटक दल भी था। इसके चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने आडवाणी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया की थी।

चौटाला ने कहा था कि आडवानी प्रधानमंत्री न बनने से निराशा में हैं, इसलिए इस तरह के बयान दे रहे हैं जिससे अटल बिहारी वाजपेयी की छवि को नुकसान हो। चौटाला ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बेहतर इंसान व बड़े दिल वाला नेता भी बताया था।

इनेलो नेता ने यहां तक सवाल किया था कि आडवानी क्या पंजाब और अन्य प्रदेशों में किसी क्षेत्रीय दल के साथ चुनावी समझौता नहीं करेंगे। हालांकि आडवाणी ने चौटाला के सवालों का जवाब नहीं दिया मगर 2004 के च़ुनाव में भाजपा ने किसी दल के साथ हरियाणा में समझौता नहीं किया। इसका परिणाम भी यह सामने आया कि राज्य की दस सीटों में से भाजपा सिर्फ एक सोनीपत ही जीत पाई थी, बाकी 9 सीट कांग्रेस ने जीती थी। 1999 का लोकसभा चुनाव इनेलो और भाजपा ने मिलकर लड़ा था, इसमें इनेलो और भाजपा ने सभी दस सीटें जीती थीं। तब दोनाें दलों को 5-5 सीट मिली थीं।

क्षेत्रीय दलों ने आडवाणी के बयान को दिया था राजनीतिक तूल

आडवाणी के पलवल बयान को तब गैर कांग्रेसी विचारधारा के क्षेत्रीय दलों ने राजनीतिक तूल दिया था। इनेलो सहित कई दलों ने यहां तक कहा था कि आडवाणी ने पलवल में साफ कहा है कि यदि भाजपा को वोट न दें तो वे कांग्रेस को वोट दें। आडवाणी का क्षेत्रीय दलों को वोट नहीं दिए जाने के बयान को बाद में यहां तक प्रचारित कर दिया गया था कि वे प्रधानमंत्री नहीं बनाए जाने की निराशा में भाजपा के खिलाफ प्रचार करने में जुट गए हैं। आडवाणी के इस बयान से काफी समय तक राजनीति में गर्माहट रही।

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