Lok Sabha Election 2019 : अब भी खूंटे पर टंगी आस

जमशेदपुर। इस बार के चुनाव में पता नहीं क्या हो गया है कि बड़े-बड़े दल भी उम्मीदवारों का नाम लेने में काफी संकोच कर रहे हैं। पहले एक बार में पूरे सूबे का नाम घोषित कर दिया जाता था, जबकि इस बार किस्तों में नाम लिया जा रहा है। इसी चक्कर में अपने शहर के भी एक नेताजी फंसे हैं।

करीब एक सप्ताह से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। वहां भी उन्हें ना दिन में चैन आ रहा है, ना रात को नींद। यहां उनके चेले-चपाटों की रात भी करवटें बदलते कट रही है। सुबह होते ही फोन लगाकर पूछते हैं, क्या हुआ। नेताजी का फाइनल हुआ कि नहीं। कब होगा। इतने बड़े नेताजी हैं, जांचे-परखे हैं, फिर क्यों देर हो रही है। कहीं इनका पत्ता भी तो नहीं कट जाएगा। जैसे-जैसे देर हो रही है अनिष्ट की आशंका गहराती जा रही है। रोज बताया जाता है कि बस आज रात या कल दिन में नाम पुकारा जाएगा।

दिखाने लगे सामाजिक सौहार्द

चुनाव चीज ही ऐसी है, जो अच्छे-अच्छों को सुधार देती है। भले ही आप अब तक अपने समाज-संगत में सक्रिय रहे हों, चुनाव आते ही दूसरों की ओर देखने लगते हैं। हाल में ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है। एक शख्स को टिकट मिला तो आनन-फानन में समाज के लोगों से मिलने को उतावले हो उठे। एक ऐसे घर की चौखट लांघने पहुंच गए, जिसका कभी वो नाम तक नहीं लेते थे। जीन के मुताबिक छत्तीस का आंकड़ा शुरू से ही था, लेकिन राजनीतिक सौदेबाजी की वजह से उनसे मिलने चले गए। मिले ही नहीं, जी भर के गले भी मिले। चाय-नाश्ता किया और जाते-जाते भाई आप पर भरोसा है, साथ जरूर दीजिएगा का आशीर्वाद मांगकर वहां से निकले।

इसके बाद नेताजी एक-दो स्थान पर और गए, जहां उन्हें देखते ही उनके साथ चल रहे लोग भी चौंक जा रहे थे। साथ वालों ने कहा कि कभी नेताजी इन्हें पानी पी-पीकर कोसते थे। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि नेताजी कभी इनसे भी आशीर्वाद मांगेंगे। एक ने कहा, अभी देखते जाइए और कहां-कहां जाते हैं नेताजी।

Share Button

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *