दिल्ली में धूल ने बिगाड़ी लोगों की सेहत, लोग हो रहे बीमार

नई दिल्ली। आवाज का शोर, उड़ता धूल का गुबार और सड़क पर जमी धूल की मोटी परत को देखकर ऐसा लगता है मानो कई महीने से सड़क की सफाई या सुध ही नहीं ली गई है। गलियों व सड़कों से गुजरने वाले वाहन जब अपने पीछे धूल का गुबार उड़ाते आगे बढ़ते हैं तो धूल से बेहाल जनता नेताओं से हिसाब किताब करने को तैयार नजर आती है।

आम जनता की नजर में इस बार सड़क की खस्ताहाल दशा व जमा धूल की मोटी परत जनता की निगाह में बड़ा मुद्दा है, जिसका जवाब इस बार हर पार्टी के उम्मीदवार को देना ही होगा। लोग ऐसी धूल का हिसाब किताब करेंगे जो अंदर जाकर फेफड़ों को कमजोर कर रहा है।

मुख्य सड़क की बात करें या कम चौड़ी सड़क की, रोजाना सड़कों की सफाई लोगों के लिए सपने जैसा है। सफाई कर्मचारी गाहे-बगाहे आ भी जाएं तो खानापूर्ति करके चलते बनते हैं। ये सफाई के बाद जमा धूल व गंदगी को सड़क किनारे छोड़कर चलते बनते हैं। हालात यह है कि जिन सड़कों की खोदाई हो गई है वहां तो ये कर्मचारी जाते ही नहीं।

कई लोग मजबूरी के कारण अपने घर या दुकान के सामने सड़क के हिस्से में पानी का छिड़काव कर धूल की समस्या का समाधान करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह बात भी है कि इस प्रयास की एक सीमा है। नियमों के अनुसार सड़क की सफाई से पहले वहां पानी का छिड़काव होना चाहिए ताकि धूल हवा में न उड़े, लेकिन इस नियम का पालन कहीं नहीं होता है। यहां तक कि जहां भवन निर्माण सामग्री के ढेर रखे होते हैं वहां भी इस नियम की अनदेखी होती है। कहीं भी रेत या मिट्टी को ढककर नहीं रखा जाता है।

पश्चिमी दिल्ली की लाइफलाइन माने जाने वाली नजफगढ़ रोड के बड़े हिस्से पर करीब तीन महीने पूर्व जल बोर्ड की ओर से खोदाई की गई थी। खोदाई के बाद उस सड़क को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। सुबह हो शाम या फिर देर रात वाहनों की बात को छोड़ दीजिए पैदल चलने पर भी धूल उड़ने लगती है। यहां से गुजरने पर इस समस्या की भयावहता को समझ सकते हैं।

नजफगढ़ रोड की बात छोड़ दें तो चाहे दुर्गा पार्क रोड, नजफगढ़- नांगलोई रोड, विकासनगर रोड, पालम डाबड़ी रोड, पालम रेलवे स्टेशन रोड, विकासनगर मेन रोड, ओम विहार फेस पांच रोड, ओल्ड ककरौला रोड सहित ऐसे अनेक रोड हैं जहां हर राहगीर हर सांस के साथ धूल फांकने को मजबूर है।

अस्थमा का रहता है खतरा

सूखी कंक्रीट से उड़ने वाली धूल से श्वास व त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। चिकित्सकों का कहना है कि कंक्रीट की धूल में सिलिका व अन्य खतरनाक तत्व रहते हैं। श्वास के रास्ते इन तत्वों के प्रवेश से फेफड़े में संक्रमण उत्पन्न कर सकता है। इससे अस्थमा की संभावना बन जाती है। यह नेत्र व त्वचा संबंधी बीमारियों का भी कारण बन सकता है।

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