शीला Vs मनोज: जानें कैसे एक की जीत से दूसरे का राजनीतिक भविष्य पड़ जाएगा खतरे में

नई दिल्ली। दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर 12 मई को वोट पड़ेंगे। उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट का मुकाबला रोमांचक हो चला है। यहां तीनों प्रमुख पार्टियों यानी कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने सबसे मजबूत उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। विकास के मामले में पिछड़े उत्तर पूर्वी दिल्ली में कांग्रेस ने विकास के अनुभवी चेहरे के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को टिकट दिया है तो भाजपा ने मनोज तिवारी को। दोनों ही अपनी-अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

AAP ने भी अपने पूर्व प्रदेश संयोजक दिलीप पांडेय को मैदान में उतारा है। शीला 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही हैं। उन्होंने पहला चुनाव 1998 में पूर्वी दिल्ली से लड़ा था, तब उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट इसी में समाहित थी। उस समय शीला को हार मिली थी। वहीं, मनोज तिवारी यहां के मौजूदा सांसद हैं। पार्टी ने एक बार फिर उन्हीं पर उम्मीद जताई है। इस तरह से तीनों प्रमुख पार्टियों ने इस सीट को गंभीरता से लिया है।

2014 में भाजपा के उम्मीदवार मनोज तिवारी ने आप के उम्मीदवार प्रोफेसर आनंद कुमार को हराया था। इसमें कांग्रेस के उम्मीदवार जय प्रकाश अग्रवाल तीसरे नंबर पर रहे थे। यहां पूर्वांचल के लोगों की संख्या करीब पांच लाख है। इसी वजह से पिछले और इस चुनाव में भाजपा और आप ने पूर्वांचली को ही प्रत्याशी बनाया है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में सबसे अधिक अनधिकृत कॉलोनियां हैं। इन कॉलोनियों में समस्याएं सबसे ज्यादा हैं। हर मूलभूल सुविधाओं से जूझते यहां के लोग राजनीतिक रूप से परिपक्व माने जाते हैं। इस सीट की खासियत है कि यहां सभी जातियों के लोग रहते हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाता भी करीब पांच लाख हैं। ऐसे में आप और कांग्रेस की नजर इस वोट बैंक पर टिकी है। दोनों पार्टियों की कोशिश है कि उन्हें इनका एकमुश्त वोट पड़े। पिछले चुनाव में यहां करीब 67 फीसद मत पड़े थे। ऐसे में इस बार भी यहां मतदान फीसद ठीक रहने का अनुमान है।

प्रत्याशियों की बात करें तो मनोज तिवारी भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल हैं। वह प्रदेश अध्यक्ष हैं। इस नाते पूरी पार्टी का साथ उन्हें मिल रहा है। निगम चुनाव में जीत का सेहरा सिर पर बंधा हुआ है। पूर्वांचल से आने और भोजपुरी गायक और अभिनेता होने के कारण पूर्वांचल के लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हैं।

सांसद रहने के दौरान क्षेत्र के लिए कई योजनाएं लेकर आए। इसके अलावा उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच साल के कामकाज का फायदा मिलने की संभावना है। वहीं आप प्रत्याशी दिलीप पांडेय इस सीट के लिए नया और युवा चेहरा हैं। काफी समय से क्षेत्र में सक्रिय रहने का लाभ मिल सकता है। पूर्वांचल के होने के कारण पूर्वांचलियों का साथ मिल सकता है।

मुस्लिम मतदाताओं में पार्टी की मजबूत पकड़ होने के कारण इस सीट पर उनका समर्थन मिलने का अनुमान है। वहीं शीला दीक्षित 15 साल मुख्यमंत्री रहीं। इस दौरान दिल्ली में मेट्रो आई। नई सड़कें और फ्लाईओवर बने। उनके कार्यों को लेकर लोग आज भी उन्हें याद करते हैं। वह दिल्ली कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता हैं। उन्हें जिताने के लिए पूरी पार्टी शिद्दत से जुटी हुई है। उनके चुनाव में खड़े होने से कार्यकर्ताओं में भी उत्साह बढ़ा है।

शीला दीक्षित का कहना है कि राजधानी में कांग्रेस की 15 साल लगातार सरकार रही। इस दौरान हमने दिल्ली को चमका दिया। नई सड़कें बनाईं। फ्लाई ओवर बनाए। लेकिन आज की स्थिति देख लीजिए। सरकार अपना काम ठीक से नहीं कर रही है। मैं इस क्षेत्र के विकास का हरसंभव प्रयास करूंगी।

उत्तर पूर्वी दिल्ली का दर्द यह है कि आजादी के 70 साल बाद भी यह दिल्ली नहीं बन पाई है। मैं यह संकल्प ले रहा हूं कि भले ही हम इसे सिंगापुर न बना पाएं लेकिन दिल्ली के बराबर लेकर आएंगे।

उत्तर पूर्वी दिल्ली में मैंने कई विकास कार्य किए। सिग्नेचर ब्रिज व मेट्रो मेरे ही कार्यकाल में यहां आए। एलीवेटेड रोड की योजना शुरू कराई। इसके साथ कई अन्य कामों की लंबी फेहरिस्त है। क्षेत्र के संपूर्ण विकास का खाका मैंने खींचा हुआ है।

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