Exit Polls में फिर मोदी सरकार बनने का अनुमान, दुनिया भर के मीडिया में चर्चे

नई दिल्‍ली। पिछले दशकों में भारत ने पूरी दुनिया को पीएम नरेंद्र मोदी के रूप में सबसे शक्तिशाली और निर्णायक नेता के रूप में दिया है। पिछले रविवार को भारत में लोक‍सभा चुनाव खत्‍म हो गए हैं। Exit polls में एक बार फिर मोदी सरकार बनने के संकेत मिले हैं। इससे लेकर पूरी दुनिया की मीडिया में चर्चे शुरू हो गए हैं।

नरेंद्र मोदी हैं हिंदूवादी राष्ट्रवादी राजनीति के ब्रांड 
नरेंद्र मोदी मानव इतिहास में सबसे बड़े लोकतांत्रिक वोटों से चुने गए सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं। हालांकि भारत में बढ़ती बेरोजगारी और खेतीबाड़ी पर संकट के बारे में बढ़ती शिकायतों से अपेक्षाकृत लोग असंतुष्ट हैं। सभी प्रमुख एग्जिट पोल के अनुसार, नरेंद्र मोदी हिंदूवादी राष्ट्रवादी राजनीति के ब्रांड हैं। उन्‍होंने अपने प्रयासों से विदेश में भारत की एक मजबूत छवि बनाई है। मतदान के दौरान 90 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं के बीच बेहतर तरीके से अपनी बात पहुंचाई।

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यदि एग्जिट पोल (Exit polls) सही साबित होते हैं, तो पीएम मोदी के मजबूत हाथों में पांच और वर्षों के लिए शासन करने के लिए तैनात होंगे। चुनाव के सबसे अंत में उन्होंने एक भावुक हिंदू के रूप में अभियान चलाया। नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात और रविवार की सुबह चुनाव के आखिरी दिन एक हिंदू मंदिर में प्रार्थना की और एक हिमालय की गुफा में ध्यान लगाया।

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ज्‍यादातर विश्लेषकों ने मोदी सरकार को लेकर लगाया था अनुमान 
भारतीय मीडिया संगठनों द्वारा रविवार रात को किए गए कम से कम सात एग्जिट पोल्‍स (Exit polls) में अनुमान लगाया गया है कि नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगी लोकसभा चुनाव में 542 सीटों में कम से कम 280 सीटें जीत सकते हैं। इससे वे अगले सशक्‍त प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाएंगे।  यदि वास्तविक रिजल्‍ट एग्जिट पोल्‍स को ही दर्शाते हैं तो यह कहीं अधिक प्रभावी प्रदर्शन होगा जैसाकि कई विश्लेषकों ने सोचा था कि ऐसा संभव है। लोकसभा चुनावों को लेकर गुरुवार को वास्‍तविक रिजल्‍ट आएंगे।

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‘चौंकने वाले हैं एग्जिट पोल्‍स’
जेएनयू की राजनीतिक शास्‍त्र की पूर्व प्रोफेसर सुधा पाइ का कहना है कि एग्जिट पोल्‍स (Exit polls) चौंकने वाले हैं। उन्‍होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को लेकर सोशल मीडिया पर जोरदार तरीके से माहौल बनाया गया। इस तथ्य से इन्‍कार नहीं किया जा सकता है कि चुनावों में विपक्ष विभाजित था। इसका अपेक्षा से अधिक लाभ मिला। अन्य हाल के भारतीय चुनावों में भी इसी तरह के एग्जिट पोल ने व्यापक रुझानों की सटीक भविष्यवाणी की है।

एग्जिट पोल ने अनुमान लगाया है कि प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस 2014 में पिछले चुनावों में हुई आश्चर्यजनक हार से इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन अभी भी उसकी किस्‍मत में दूसरे स्‍थान पर रहना लग रहा है।

काफी कोशिश के बाद भी राहुल गांधी रहे नाकाम 
कांग्रेस के नेता और भारत की राजनीति में वंशवाद के वाहक नेता राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों में सांप्रदायिक सद्भाव और अल्पसंख्यक अधिकारों की अपील करके मतदाताओं का वोट लेने की कोशिश की लेकिन यह नरेंद्र मोदी की आक्रामक और बेहतर तरीके से वित्तपोषित अभियान के लिए सामने कोई मुकाबला नहीं था, जिन्‍हें भारत के हिंदू बहुमत में काफी संख्‍या में जमीनी समूहों का समर्थन मिला।

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पांच वर्षों में मोदी की लोकप्रियता में नहीं आई कमी 
कार्नेगी एंडोमेंट इन इंटरनेशनल पीस के दक्षिण एशिया विशेषज्ञ मिलन वैष्णव ने कहा कि ‘एक बात जो हम निश्चित रूप से जानते हैं, वह यह है कि मोदी पिछले पांच वर्षों में सब कुछ होने के बावजूद अविश्वसनीय रूप से लोकप्रिय बने हुए हैं।’ वह उनमें नहीं थे जो वास्तव में उससे चिपके रहते हैं।

काफी कठिन रहा चुनावी अभियान
लोकसभा चुनाव का कार्यक्रम छह हफ्तों तक चला। देश के विभिन्‍न भागों में अलग-अलग समय में मतदान हुआ। पहला मतदान अप्रैल के बीच में मतदान हुआ और सबसे आखिर में 19 मई को हुआ। सभी मतदानों के परिणाम गुरुवार, 23 मई को जारी किए जाएंगे। भारतीय अधिकारियों ने लोकसभा चुनावों के विशाल परिदृश्य में ऊंचे बर्फीले पहाड़ों से लेकर अंडमान सागर में उष्णकटिबंधीय द्वीपों तक अलग-अलग मतदान स्‍थलों में मतदान कराया।

बालाकोट पर हमले के बाद मोदी की रेटिंग में उछाल 
चुनावी अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। इस साल की शुरुआत में अर्थव्यवस्था को लेकर गलत कदम उठाने से लोगों में असंतोष दिखाई दिया। किसानों ने उनकी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। तब उन्‍होंने कहा कि सरकार की नीतियां गरीबों के लिए हैं।

लेकिन फरवरी के महीने में नरेंद्र मोदी को भारी बढ़त देखने को मिली। कश्‍मीर के पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों पर आतंकी हमला किया गया, जिसमें चालीस जवानों की मौत हो गई। इसके बाद पीएम मदी ने पाकिस्‍तान के ऊपर एयरस्‍ट्राइक का आदेश दिया। हालांकि स्वतंत्र सुरक्षा विश्लेषकों ने कहा कि एयर स्‍ट्राइक अपने लक्ष्य से चूक गए या कि पाकिस्तान ने अगले दिन एक भारतीय फाइटर जेट को गिरा दिया। भारतीय लोगों के बीच यह मुद्दा नहीं रहा। देश प्रेम के कारण पूरे देश में भारतीय झंडे बाहर निकल आए। अनुमानों के अनुसार इस दौरान मोदी की रेटिंग बहुत तेजी से बढ़ी।

उत्‍तर प्रदेश के इलाहाबाद जो अब प्रयागराज है में इस महीने में मोदी ने बड़ी रैली की। विपक्षी दलों की शिकायतें हैं कि भारत मोदी के तहत अधिक विभाजित हो गया है और कई मतदाताओं के दिमाग नहीं बदले हैं। आंकड़ों के अनुसार नरेंद्र मोदी की पार्टी ने पिछले चुनावों में जीते अधिकांश क्षेत्रों में फिर से जीत हासिल की है।

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