Bihar Election 2020: दिग्गज नेताओं ने अगली पीढ़ी के लिए की व्यूह रचना, वंशवाद की राजनीति में कोई भी दल पीछे नहीं

पटना। बिहार में इस बार सभी दलों में बेटे-बेटियों एवं बहुओं के लिए संघर्ष का अभेद्य मोर्चा तैयार किया जा रहा। कई ने तैयार भी कर लिया है। कुछ अभी प्रयास में हैं। अपनों के लिए फील्ड सजाने-बनाने में राजद सबसे आगे है। भाजपा-जदयू और कांग्रेस में भी ऐसे पिताओं की कमी नहीं है, जो अपने बेटे-बेटियों की किस्मत को जंगे-मैदान में भेजने से पहले ही तय करने की जुगत में हैं।

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लालू यादव और जगदानंग ने तैयार किए बेटों के लिए फील्‍ड

राजद प्रमुख लालू प्रसाद एवं प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने अपने बेटों के लिए ऐसा फील्ड तैयार किया है कि युद्ध शुरू हो तो सारे समीकरण अपने पक्ष में रहे। हालांकि राजद प्रमुख के सियासी उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव इस बार खुद सेनापति की भूमिका में हैं। फिर भी लालू की सलाह पर अपने क्षेत्र राघोपुर के लिए अच्छी घेराबंदी की है। राघोपुर में यादव, राजपूत, चौरसिया और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की तादाद अच्छी है। इसलिए तेजस्वी ने आसपास की तीन सीटों महनार, हाजीपुर और पातेपुर क्षेत्र में सामाजिक समीकरण का कॉकटेल तैयार किया। राजपूतों का समर्थन लेने के लिए उन्होंने रामा सिंह पर दांव लगाया। उनकी पत्नी वीणा देवी को महनार से राजद का टिकट भी दिया।

इन दिग्‍गज पुत्रों के साथ मजबूत घेराबंदी

राघोपुर से सटा दूसरा क्षेत्र हाजीपुर है, जहां से देवकुमार चौरसिया को राजद का प्रत्याशी बनाया गया है। सामाजिक समीकरण के लिहाज से चौरसिया को थ्री इन वन माना गया है। इस समुदाय को बिहार में वैश्य के साथ ही अति पिछड़ा भी माना जाता है। राघोपुर के बगल में एक महत्वपूर्ण सीट पातेपुर है। यह अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। तेजस्वी ने यहां से अपने सबसे विश्वस्त सहयोगी शिवचंद्र राम को प्रत्याशी बनाया है। पूर्व मंत्री हैं। बड़ा चेहरा हैं। राजद के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। पिछली बार वह राजापाकर से विधायक बने थे, परंतु अबकी तेजस्वी के संघर्ष में सहायक बनेंगे। शिवचंद्र के जरिए तेजस्वी ने राघोपुर के दलित वर्ग के मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया है। इस तरह लालू की सलाह पर तेजस्वी ने अपने सारे मोर्चों की मजबूत घेराबंदी की है।

जगदानंद के पुत्र की राह आसान करने की जुगत

राजद में तेजस्वी के बाद जगदानंद सिंह ने भी पुत्र सुधाकर सिंह के संघर्ष को मजबूत करने के लिए सारी कायनात को अनुकूल करने की जुगत की है। रामगढ़ उनकी परंपरागत सीट है, जहां से राजद ने उनके पुत्र सुधाकर पर भरोसा जताया है।

पुत्रों को चंद्रगुप्त बना रहे और भी कई चाणक्य 

राजद में पूर्व सांसद जयप्रकाश नारायण यादव ने अपनी पुत्री दिव्या प्रकाश को तारापुर से राजद का सिंबल दिलाया है। कांति सिंह ने पुत्र ऋषि को ओबरा से उतार दिया है। शिवानंद तिवारी ने तो पिछले चुनाव में ही बेटे राहुल तिवारी को उत्तराधिकार सौंप दिया था। शाहपुर से वह फिर मैदान में हैं।

पुत्र मोह पर सबकुछ लगाया दांव पर

कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने पुत्र मोह में अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया है। सदानंद सिंह ने कहलगांव में अपने पुत्र को और वजीरगंज में अवधेश कुमार सिंह ने अपने पुत्र को आगे किया है। दोनों पिता पहले बेटे के लिए अतिरिक्त सीटें चाह रहे थे। काम नहीं बना तो अपने बदले पुत्रों को ही लड़ाना बेहतर समझा।

जारी है चौबे कर कोशिश

भाजपा के केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का प्रयास अभी जारी है। वह भागलपुर से पुत्र अर्जित शाश्वत को टिकट दिलाने की कोशिश में हैं। वैसे प्रयास तो सांसद गोपाल नारायण सिंह, अमरेंद्र प्रताप सिंह और ओमप्रकाश यादव ने भी किया, लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिल सकी।

जदयू में इन्‍हें भी मौका

जदयू के मंत्री कपिलदेव कामत ने अपने बदले अपनी बहू मीना कामत को मौका दिया है। एकमा सीट से धूमल सिंह ने पत्नी सीता देवी को उतारा है। राजगीर में हरियाणा के राज्यपाल एसएन आर्या के पुत्र कौशल किशोर को जदयू ने प्रत्याशी बनाया है।

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